दिल्ली
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1857 की क्रांति: 12 मई की आधी रात लाल किले में क्यों दी गई...
1857 में 12 मई की सुबह दिल्ली अंग्रेज़ों से लगभग पूरी तरह खाली थी। वह अंग्रेज़ जो 1803 से वहां हुकूमत कर रहे थे...
खाद्यान्न संकट के बीच मना था 15 अगस्त 1947 का जश्न
बंटवारे की आह के बीच नया भारत अंगड़ाई लेने को तैयार था। हर आंख नम थी लेकिन दिल में देश की आजादी का उमंग...
पश्चिम की वैज्ञानिक तरक्की देखकर क्यों दुखी थे मिर्जा गालिब
मिर्जा गालिब बहुत मायूस थे। उनकी मायूसी की एक वजह यह भी थी कि वह आम दिल्ली वालों के विपरीत पश्चिम की साइंसी तरक्की...
1857 की क्रांति: जब बहादुर शाह जफर का हुआ विद्रोहियों से आमना-सामना
1857 की क्रांति: विद्रोही दिल्ली में प्रवेश कर चुके थे। 11 मई की दोपहर को कोई तीन बजे के करीब हालात और भी बिगड़...
महाभारत काल से जुड़ा है दिल्ली का टेसू लोकगीत
मेरा टेसू यहीं अड़ा
खाने को मांगे दही बड़ा
दशहरे के आसपास लड़कों की टोलियां गली-मुहल्लों में हाथ में टेसू लिए घूमती फिरती थीं। एक किंवदंती...
मुस्लिम काल की दिल्ली (पठान काल) : बलबन के मकबरे का इतिहास
यह कुतब मीनार से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है। यह अल्मतश के मकबरे और अलाई दरवाजे के समान ही चौकोर था, मगर इन...
मुगल काल की दिल्ली : खिजरी दरवाजा
मुसम्मन बुर्ज के नीचे चंद सीढ़ियां उतरकर दरिया के किनारे पहुंच जाते हैं। यह वही दरवाजा है, जिसको कप्तान डगलस 11 मई 1857 को...
धूप से बचने के लिए कबूतर का बादल बना लेते थे बहादुरशाह जफर
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली
जहांगीर के शासन काल में कबूतरबाजी को इश्कबाजी का नाम भी दे दिया गया था। शायद इसकी वजह जहांगीर का नौजवानी...
मुस्लिम काल की दिल्ली (पठान काल): मकबरा सलाउद्दीन
सलाउद्दीन शेख सदरुद्दीन के शिष्य थे। उनकी मृत्यु दिल्ली में हुई और उनको खिड़की गांव से एक मील के करीब दफन किया गया। मकबरा...
टाउन हाल में अंग्रेजों ने हाथी की प्रतिमा क्यों स्थापित की थी
मलका के बुत के पीछे टाउन हाल की इमारत है। जिसमें आजकल दिल्ली म्युनिसिपल कारपोरेशन का दफ्तर है। यह इमारत 1863 ई. में बननी...














