दिल्ली
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1857 की क्रांति व स्वतंत्रता संग्राम में खूब गाए गए दिल्ली के लोकगीत
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सन 1857 हंगामे का दौर है। मेरठ में फ़ौज ने बग़ावत कर दी है। दिल्ली की गलियों में भी जोशीले नौजवान...
मुस्लिम काल की दिल्ली (पठान काल) : कुतुब साहब की मस्जिद का इतिहास
गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है फूल वालों की सैर मेला
यह 22 फुट लंबी और 21 फुट चौड़ी है। इसमें तीन दरवाजे हैं। कहा जाता...
दिल्ली के विश्वप्रसिद्ध मोठ मस्जिद के निर्माण का इतिहास Moth masjid
यह मस्जिद मुबारकपुर (Mubarakpur) के बीच स्थित है। खुलासत-उल-तारीख में मोठ की मस्जिद (Moth ki masjid) के बारे में एक दिलचस्प कहानी बताई गई...
आस्कर सम्मानित ब्रिटिश फिल्मकार रिचर्ड सैमुअल एटनबरो ने इस तरह सीखा था चरखा चलाना,...
रिंग रोड पर वाहनों की भागमभाग, लगा रेला और जाम में फंसकर चिल्लाते लोगों के ठीक उलट सड़क किनारे स्थित गांधी हिंदुस्तान साहित्य सभा...
दिल्ली के बच्चों को बहुत पसंद है सुरंग लाल घोड़ी खेल
दिल्ली के बच्चों का पसंदीदा खेल
दिल्ली के बच्चों के पसंदीदा खेल की यह तीसरी कड़ी है। इसमें हम आपको सुरंग लाल घोड़ी, चम्मो रानी...
बहादुर शाह जफर को पीर क्यों मानती थी प्रजा
बहादुर शाह जफर को दिल्ली के बहुत लोग सूफी पीर मानते थे। उनके कई शागिर्द और मुरीद थे। देहली उर्दू अखबार ने तो यह...
क्यों अधूरा रह गया दिल्ली के जंतर मंतर का निर्माण
इसको अंबर के राजा जयसिंह ने 1724 ई. में बनवाया था। यह नई दिल्ली में पार्लियामेंट स्ट्रीट पर कनाट प्लेस से नजदीक ही स्थित...
कबूतर पालने का इतिहास, दिल्ली में कैसे लोकप्रिय हुआ कबूतरबाजी
एक समय संदेश भेजने के लिए सबसे विश्वसनीय समझे जाते थे कबूतर
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली
इंसान ने कबूतर को हमेशा दो मकसदों से पाला है।...
जब दिल्ली के अखाड़े में महात्मा गांधी ने पहलवान को दे डाली चुनौती
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का दिल्ली से दिली जुड़ाव रहा। एक बार गांधी जी को दंगल में बुलाया गया। आयोेजकों के आमंत्रण को गांधीजी ने...
मुगल काल की दिल्ली : दरगाह ख्वाजा बाकी बिल्लाह (1603 ई.)
बाकी बिल्लाह काबुल के रहने वाले थे। यह अकबर बादशाह के अहद में दिल्ली आए और 1603 ई. में इनकी मृत्यु हुई। इनको दिल्ली...














